गुरुवार, 17 अगस्त 2017

महाकवि ब्रजभूषण सिंह गौतम अनुराग का निधन

            मुरादाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार, महाकवि श्री ब्रजभूषण सिंह गौतम 'अनुराग' का 84 वर्ष की आयु में दिनांक 17 अगस्त, 2017 को निधन हो गया। 



            उनका जन्म 30 जून, 1933 को बदायूं जिले में हुआ था। उन्होने हिन्दी सहित पाँच विषयों में परास्नातक उपाधि प्राप्त की। उनका प्रथम गीत संग्रह आँसू सन् 1951 में प्रकाशित हुआ। उनके दो महाकाव्य 'दर्पण मेरे गाँव का' और 'चाँदनी' काफी चर्चित रहे। उन्होने अपने जीवन काल में लगभग तीन दर्जन  पुस्तकें लिखी, जिनमें एक दर्जन से अधिक प्रकाशित हो चुकी है। आँसू, हिन्दुत्व विनाश की ओर, दर्पन मेरे गाँव का, चाँदनी, धूप आती ही नही, सोनजुही की गन्ध, आँगन में सोनपरी, अपने-अपने सूरज, साँसो की समाधि, चन्दन वन सँवरें, एक टुकड़ा आसमान, आँगन से आकाश तक आदि उनकी कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं।
      
            उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उन्हे 'दर्पन मेरे गाँव का' महाकाव्य के लिए 15,000 रुपये तथा उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा 'चाँदनी' महाकाव्य के लिए 8,000 रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हे दो दर्जन से अधिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। मुरादाबाद शहर का साहित्य ब्रजभूषण सिंह गौतम अनुराग जी के इस बहुमूल्य साहित्यिक योगदान के लिए सदैव ऋणी रहेगा।  साहित्य मुरादाबाद इण्टरनेट पत्रिका परिवार आपको शत-शत नमन करता है।

सोमवार, 14 अगस्त 2017

कवियों ने प्रस्तुत की देशभक्ति कविताएँ

राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति ने किया काव्य-गोष्ठी का आयोजन


             १४ अगस्त, 2 17 ई० को स्वतंत्रता दिवस एवं श्रीकृष्ण जन्माटष्मी की पूर्व संध्या पर, 'राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, मुरादाबाद' की ओर से एक काव्य-गोष्ठी का आयोजन, विश्नोई धर्मशाला, लाइनपार, मुरादाबाद में किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. मीना कौल ने की। मुख्य अतिथि श्री ओंकार सिंह 'ओंकार' एवम् विशिष्ट अतिथि श्री रमेश चन्द्र गुप्ता रहे। सरस्वती वन्दना रामसिंह 'निशंक' ने प्रस्तुत की एवम् संचालन राजीव 'प्रखर' ने किया।



             रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से विभिन्न सामाजिक मुद्दों को सशक्त रूप से उठाया। साथ ही देशभक्तिपूर्ण रचनाओ से श्रोताओं को मुग्ध कर लिया। अशोक 'विद्रोही', राजीव 'प्रखर', रामसिंह 'निशंक', रामेश्वर वशिष्ठ, कृपाल सिंह धीमान, जय प्रकाश विश्नोई, वीरेन्द्र सिंह 'बृजवासी', डॉ. अम्बरीश गर्ग, रघुराज सिंह 'निश्चल', यगेन्द्रपाल विश्नोई, ओंकार सिंहल'ओंकार', डॉ. मीना कौल, रमेश गुप्ता एवम् रमेश यादव 'कृष्ण' ने काव्य पाठ किया। डॉ. अम्बरीश गर्ग द्वारा आभाराभिव्यक्ति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

रविवार, 6 अगस्त 2017

मैं आँखों की सुन लूँगा, तुम आँखों से बोलो

हिन्दी साहित्य संगम की कवि-गोष्ठी में रचनाकारों ने किया काव्यपाठ

       दिनांक 6 अगस्त, 2017 को हिन्दी साहित्य संगम की माह अगस्त की काव्य-गोष्ठी, आकांक्षा विद्यापीठ, मिलन विहार, मुरादाबाद  में सम्पन्न हुई, जिसमें कविगणों ने विभिन्न ज्वलंत विषयों को अपने काव्य-पाठ के माध्यम से उठाया। राजीव 'प्रखर' ने अपने दोहे में कहा "किस मुख से तू पीटता, आज़ादी का ढोल। जा मिठ्ठू का पिन्जरा, सबसे पहले खोल।


      "प्रदीप शर्मा 'विरल' ने "शब्द न मन के कोई भी तुम, होठों से बोलो। मैं आँखों की सुन लूँगा, तुम आँखों से बोलो। "आशुतोष कुलश्रेष्ठ ने "राखी का बंधन इतना सुदृढ़, भाई बहिन का प्यार। बहिना बाँधे भाई के राखी, देती उसे दुलार। मोनिका शर्मा 'मासूम' ने "सीने में आईने के तू झाँका नहीं कभी। इसने भी राज़े दिल, कोई खोला नहीं कभी ।" हेमा तिवारी भट्ट ने "रिश्तों में बड़ा रिश्ता भाई। प्रिय बहन को होता भाई। उपदेशक रक्षक है भाई, मित्र कभी जनक है भाई।" रामसिंह निशंक ने"आता इक दिन साल मे, रक्षाबन्धन पर्व। हम सबको इस पर सदा, होना चाहिये गर्व।" 

       विकास मुरादाबादी ने "आओ मिलकर बात करें हम, स्वयं को नेक बनाने की। बात करें भारत समाज को, आओ एक बनाने की।" रामदत्त द्विवेदी ने "पास सभी कुछ था उसके पर, फिर भी चैन न मन को था। स्थिति ऐसी बनी न तन पर, कोई वस्त्र कफ़न को था।" रामेश्वर वशिष्ठ ने "आया सावन झूम के, झूलें चमकें खूब।" डॉ. मीना कौल ने "हम हवाओं में विष मत घोलो। सोचो, समझो, परखो, बोलो।" ओंकार सिंह ओंकार ने "आदमी को आदमी से, दुश्मनी क्यों हो गई। इस क़दर मुश्किल जहाँ में, ज़िन्दगी क्यों हो गई।" सतीश 'सार्थक' ने "तेरे मेरे जीवन की ये, कैसी अमिट कहानी रे। सुन्दर-सुन्दर प्यारी-प्यारी, कैसी शाम सुहानी रे।"

        कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री ओंकार सिंह 'ओंकार' ने की। मुख्य अतिथि श्री सतीश 'सार्थक' एवम् विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री रामेश्वर वशिष्ठ तथा डॉ. मीना कौल मंचासीन रहीं। माँ शारदे की वंदना श्री सतीश 'सार्थक' ने प्रस्तुत की एवम् संचालन राजीव 'प्रखर' ने किया। संस्था के अध्यक्ष, श्री रामदत्त द्विवेदी द्वारा आभाराभिव्यक्ति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

मंगलवार, 18 जुलाई 2017

हिन्दी साहित्य संगम की कवि-गोष्ठी में रचनाकारों के व्यक्त किए हृदय के भाव

"...और कफ़न पर लग गया, भैया अब तो टैक्स।"

             दिनांक 2 जुलाई, 2017 को हिन्दी साहित्य संगम के तत्वावधान में आकांक्षा विद्यापीठ इण्टर कॉलेज, मिलन विहार, मुरादाबाद में एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ ज्ञान की देवी माँ सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित करके किया गया। सरस्वती वंदना श्री राम सिंह नि:शंक ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री के. पी. सिंह 'सरल' ने की। मुख्य अतिथि श्री योगेंद्र पाल सिंह विश्नोई तथा विशिष्ट अतिथि श्री रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ जी रहे। कार्यक्रम का संचालन संगठन के महासचिव जितेन्द्र कुमार जौली द्वारा किया गया।


 
               कार्यक्रम में उपस्थित रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार किया। जी.एस.टी. के संदर्भ में जितेन्द्र कुमार जौली ने कहा, "बातें महँगी हो गयीं, कोई नहीं रिलैक्स। और कफ़न पर लग गया, भैया अब तो टैक्स।", रामसिंह निशंक ने वर्षा ऋतु का वर्णन करते हुए "आई ऋतु पावस की, छाये हैं काले घन। बरखा की फुहार में, प्रमुदित हैं सबके मन।", के. पी. सिंह सरल  ने जी.एस.टी. के संदर्भ में कहा "कुछ चीजें महँगी हुईं,  कुछ पर मिला रिलेक्स। ज्योतिष पर भी लग गया, गुरु शानि का टैक्स।", राजीव प्रखर ने "जात-पात और भेदभाव से, अब लड़ने की बारी है। उठो साथियों आजादी की जंग अभी भी जारी है।", रामदत्त द्विवेदी ने "इन्सानों का इन दिनों नहीं हो रहा नाश। अपितु हिंदुस्तानियत की है घुटती सांस।", ओंकार सिंह ओंकार ने "तपाकर खुद को सोने सा निखारना कितना मुश्किल है, खुद अपनी जिंदगी पुरनूर करना कितना मुश्किल है।", श्री रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ "ईश तुम्हें अर्पण करने को, लाया हूँ कुछ प्रेम सुमन। सुगंध ढूंढ रहा हूँ मधुमय,  फिरता हूँ उपवन-उपवन", योगेंद्रपाल सिंह विश्नोई ने "कुछ नहीं है तो बस नाम ही नाम है, दुनियादारी है तो सैंकड़ों काम हैं। हर किसी को लगी है कमी वक्त की, वक्त का जो धनी वह ही धनवान है।", वीरेंद्र सिंह बृजवासी ने हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, कहने भर को भाई-भाई, इक-दूजे के भगवानों की, महिमा फूटी आँख में भाई।", शशि त्यागी ने "नाम कमाने को इस जग में कहो न वंदेमातरम्। मन के भीतर भावों के संग होगा वंदेमातरम्।", "हेमा तिवारी भट्ट ने "दलित भले ही सब कहें, है दलहित की बात। राजनीति में जीत की, चाबी समझो जात।"

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

रिमोट का खेल - डॉ. राकेश चक्र 



पुस्तक परिचय


कृति : रिमोट का खेल (बाल गीत -संग्रह)
सर्वाधिकार : कवि
रचनाकार : डॉ. राकेश 'चक्र'
90-बी, शिवपुरी, मुरादाबाद - 244001 (उ.प्र.)
मोबाइल : 09456201857
संशोधित संस्करण : 2016 ई.
पृष्ठ : 32
मूल्य : 50 रुपये
मुद्रक : एस. के. ऑफसेट्स,
दिलशाल गार्डन, दिल्ली- 110005
प्रकाशक : हरे कृष्णा प्रकाशन
 90-बी, शिवपुरी, मुरादाबाद - 244001 (उ.प्र.)
शब्द संयोजन: मुस्कान कम्प्यूटर्स, दिल्ली 


REMOTE KA KHEL BY DR. RAKESH 'CHAKRA'



बुधवार, 5 जुलाई 2017

श्रीमती मोनिका शर्मा मासूम

परिचय- श्रीमती मोनिका शर्मा 'मासूम'

मोनिका शर्मा मासूम
नाम : मोनिका शर्मा
उपनाम : मासूम
जन्मतिथि : 17/09/1978
जन्म स्थान : आज़ादपुर,  दिल्ली
पिता का नाम : स्व० श्री विनोद शर्मा
माता का नाम : श्रीमती ऊषा शर्मा
पति का नाम : श्री विजय शर्मा
शिक्षा : स्नातक,  दिल्ली विश्वविद्यालय
अभिरूचि (हॉबी) : पुस्तकें पढ़ना,  और लिखना
सम्प्रति : गृह संचालिका
प्रकाशन : इन्टरनेट पत्रिकाओं और समाचार पत्रों आदि में रचनाओं का प्रकाशन 
लेखन की विधाएँ : गज़ल, कविताएँ,  मुक्तक, लघु कथाएँ इत्यादि 
पता : फ्रेंडज़ कॉलोनी,  चन्द्र नगर,  मुरादाबाद
सम्पर्क सूत्र : 8272833389, 9045116605
ई मेल : ms6257996@gmail.com

Monika sharma
Monika Sharma Masoom

श्रीमती हेमा तिवारी भट्ट

परिचय- श्रीमती हेमा तिवारी भट्ट

हेमा तिवारी भट्ट
नाम : हेमा तिवारी भट्ट
जन्मतिथि : 08 अक्टूबर, 1978
जन्म स्थान : कैहड़गाँव(अल्मोड़ा)
पिता का नाम : स्व. श्री के.डी.तिवारी
माता का नाम : श्रीमती सरस्वती देवी
पति का नाम : श्री गिरीश चंद्र भट्ट
शिक्षा : एम.ए.(अंग्रेजी), बी.एड.,वि.बी.टी.सी.
अभिरूचि (हॉबी) : पढ़ना, पढ़ाना, सामाजिक कार्य व लेखन
सम्प्रति : शासकीय अध्यापिका, प्र. अ. जिला अमरोहा
लेखन की विधाएँ : लेख, कविता (छन्द मुक्त, छन्द बद्ध दोनों प्रकार), लघुकथा, कहानी, समीक्षा
प्रकाशन : विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में तथा इन्टरनेट पर रचनाओं का प्रकाशन 
सम्मान : विभिन्न मंचों पर व विभिन्न संस्थाओं द्वारा साहित्यिक,सामाजिक एवं सांस्कृतिक सक्रियता हेतु सम्मानित
सम्बद्धता : हिन्दी साहित्य संगम, राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति तथा सर्व प्रयास संस्था से सदस्य के रूप
पता : अलकनंदा बैंक कॉलोनी, खुशहाल पुर,थाना मझोला,मुरादाबाद
सम्पर्क सूत्र : 9720399413
ई-मेल : bhatthema3@gmail.com


Hema Tiwari Bhatt