रविवार, 22 दिसंबर 2019

विशाखा तिवारी की काव्य-कृति हथेलियों में चाँदनी का किया गया लोकार्पण

काव्य-कृति 'हथेलियों में चाँदनी' का किया गया लोकार्पण 

        दिनाँक २२ दिसम्बर, 2019 को साहित्यिक संस्था 'अक्षरा' के तत्वाधान में नवीन नगर स्थित हरसिंगार भवन में, लोकार्पण समारोह एवं कृति चर्चा का कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें हिन्दी कविता की महत्वपूर्ण हस्ताक्षर श्रीमती विशाखा तिवारी की काव्य-कृति 'हथेलियों में चाँदनी' का लोकार्पण किया गया।



        कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं हिन्दू डिग्री कॉलेज, मुरादाबाद के पूर्व प्राचार्य, डॉ० रामानंद शर्मा ने कहा, "विशाखा जी की पुस्तक 'हथेलियों में चाँदनी' हिन्दी कविता को समृद्ध करती है। यह मुरादाबाद के साहित्य को राष्ट्रीय पहचान प्रदान करने वाले कारकों में अपना प्रमुख स्थान बनायेगी। नि:संदेह इस कृति की कविताएं संग्रहणीय हैं।" 

       कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मशहूर शायर श्री मंसूर 'उस्मानी' ने अपने उद्बोधन में कहा, "विशाखा जी की रचना धर्मिता का मुख्य द्वार है 'हथेलियों में चाँदनी'। अब तक लोग हथेलियों में मुकद्दर की लकीरों और मेहंदी की खूबसूरती को निहारते रहे हैं लेकिन मेरा यक़ीन है कि 'हथेलियों में चाँदनी' पर गौर करने में लोगों की एक उम्र बीत जायेगी।" 

       विशिष्ट अतिथि एवं सुप्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि डॉ० मक्खन 'मुरादाबादी' ने कहा, "हथेलियों में चाँदनी' पुस्तक की कविताओं में घर-परिवार, देश-समाज, गीत-संगीत, प्रकृति और गौरैया के माध्यम से जिस राग और अनुराग का दर्शन हुआ है, वह विशाखा जी के अपने ही रंग का है। उनकी कविताओं में एक ऐसी छाप है जो आलाप ही आलाप है। यह सब कुछ साहित्य में संगीत का प्रताप है।"

        सुप्रसिद्ध नवगीतकार डॉ० माहेश्वर तिवारी ने इस अवसर पर कहा, "विशाखा जी मूलता संगीतज्ञा हैं। इस नाते उनकी कविताओं में एक लयात्मकता हर ओर दिखाई पड़ जाती है। संगीत के छंद से परिचित होने के बावजूद कविता के छंद से अपरिचित होने के कारण उन्होंने मुक्त छंद की कविताएं लिखीं जो मानवीयता को समर्पित हैं।"

      कार्यक्रम का संचालन कर रहे संस्था के संयोजक योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने कहा, विशाखा जी की कविताएं उनके संगीतज्ञा से कवयित्री बनने की यात्रा का वृतांत सुनाती हैं और साक्षी बनकर अपने समय के अन्याय व क्रूरता को चुनौती देते हुए मनुष्यता का दस्तावेज बनती है। विशाखा जी की प्रेम कविताओं में शब्द अर्थों में घुल जाते हैं और अर्थ शब्दों की दिव्य देह धारण कर अनुभूति को चरमोत्कर्ष तक पहुँचाते हैं।"

       सुप्रसिद्ध शायर डॉ० कृष्ण कुमार 'नाज़' ने कृति की चर्चा करते हुए कहा, "विशाखा जी की कविताएं समर्पित प्रेम की श्रेष्ठ कविताएं हैं जो उनके व्यक्तित्व की तरह सहज व सरल भाषा में कही गई हैं और पाठक के मन को छूती हैं।" 

        शायर ज़िया ज़मीर ने समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा, "पुस्तक की कविताएं सहज, कलात्मक और हृदयस्पर्शी हैं इसलिए इन कविताओं का रस एकांत में पढ़ कर ही लिया जा सकता है।"

        चर्चित कवयित्री हेमा तिवारी भट्ट ने कहा, "हथेलियों में चाँदनी पुस्तक की कविताएं पढ़ते हुए लगता है जैसे कोई चित्रकार सामने बैठकर चित्र बना रहा है। विशाखा जी की कविताओं में गढ़े गये शब्द-चित्र पाठक को अंत तक बाँधे रखते हैं।"

       डॉ० उन्मेष सिन्हा, डॉ० प्रेमवती उपाध्याय, अशोक विश्नोई, डॉ० मीना कौल, शिशुपाल 'मधुकर', डॉ० पूनम बंसल, डॉ० बबीता गुप्ता, संजय मिश्र, मनोज 'मनु', राजीव 'प्रखर', मोनिका 'मासूम' आदि ने भी कृति के संदर्भ में विस्तारपूर्वक विचार व्यक्त किए।

         कार्यक्रम के अंत में कृति की कवयित्री विशाखा तिवारी ने एकल कविता-पाठ भी किया। उन्होंने अपनी रचनाएं पढ़ते हुए कहा -

"तुम्हारा मेरे पास होना
बन जाता है एक उत्सव
खोलना चाहती हूँ 
तुम्हारे मन की हर परत।
उतरना चाहती हूँ उसकी गहराईयों में
बाँधना चाहती हूँ तुम्हें अपने शब्दों में।"
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"वह घर में हो या घर से बाहर
उसे डर लगता है 
वह गाना चाहती है
डर के खिलाफ 
अमन का राग
रविशंकर का सितार
चौरसिया की बाँसुरी
अमजद का सरोद
खुसरो का सूफ़ी संगीत।"

काव्य-कृति बैरागी मन का किया गया लोकार्पण

काव्य-कृति 'बैरागी मन' का किया गया लोकार्पण

         दिनाँक २० दिसम्बर, 2019 को महानगर के वरिष्ठ रचनाकार श्री रामवीर सिंह 'वीर' की काव्य-कृति 'बैरागी मन' का लोकार्पण, श्री गोविन्द हिन्दी साहित्य सेवा समिति, मुरादाबाद के तत्वावधान में संस्था के कार्यालय पर संपन्न हुआ।


          कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० आर० सी० शुक्ला ने की। मुख्य अतिथि डॉ० महेश 'दिवाकर' तथा विशिष्ट अतिथि डॉ० मक्खन 'मुरादाबादी', श्री अशोक विश्नोई एवं श्री वी० सी० गर्ग रहे। माँ शारदे की वंदना श्री राम सिंह 'नि:शंक' ने प्रस्तुत की तथा कार्यक्रम का संचालन श्री योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने किया।

          कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न वक्ताओं ने श्री रामवीर सिंह 'वीर' को कृति के लोकार्पण पर बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि उनकी यह कृति 'बैरागी मन' आम जनमानस के हृदय को स्पर्श करते हुए साहित्य-जगत की एक महत्वपूर्ण कृति सिद्ध होगी। 

           विमोचन के पश्चात काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें जितेन्द्र कुमार 'जौली', हेमा तिवारी भट्ट, राजीव 'प्रखर', रामसिंह 'नि:शंक', डॉ० मनोज रस्तोगी, डॉ० राकेश 'चक्र', के० पी० 'सरल', रामेश्वर वशिष्ठ, रघुराज सिंह 'निश्चल', श्रीकृष्ण शुक्ल, योगेन्द्र वर्मा 'व्योम', योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई, रामवीर सिंह 'वीर', अशोक विश्नोई, वी० सी० गर्ग, डॉ० मक्खनन 'मुरादाबादी', डॉ० महेश 'दिवाकर' एवं डॉ० आर० सी० शुक्ल आदि ने अपनी रचनाओं के माध्यम से विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डाला। 

सोमवार, 2 दिसंबर 2019

हिन्दी साहित्य संगम ने किया डॉ० मनोज रस्तोगी को सम्मानित

       आज दिनांक 1 दिसम्बर, 2019 को हिन्दी साहित्य संगम मुरादाबाद के तत्वावधान में, संस्था के कीर्तिशेष साहित्यकार  राजेंद्र मोहन शर्मा श्रृंग जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी पावन स्मृति में महानगर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मनोज रस्तोगी को राजेंद्र मोहन शर्मा श्रृंग स्मृति साहित्य साधक सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें मानपत्र, अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न एवं श्रीफल भेंट किए गए।



     कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध नवगीतकार डॉ० माहेश्वर तिवारी ने की। मुख्य अतिथि डा०  मीना कौल एवं विशिष्ट अतिथि श्री अशोक विश्नोई, श्रीमती शिखा रस्तोगी एवं श्री रामदत्त द्विवेदी रहे। मां शारदे की वंदना श्री मयंक शर्मा ने प्रस्तुत की तथा कार्यक्रम का संचालन श्री योगेन्द्र वर्मा व्योम एवं राजीव प्रखर ने किया।

      राजीव 'प्रखर' द्वारा सम्मानित साहित्यकार डॉ० मनोज रस्तोगी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। श्री माहेश्वर तिवारी ने साहित्यिक सांस्कृतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में डॉ० मनोज रस्तोगी द्वारा किए गए योगदान को सराहते हुए उन्हें साहित्य जगत का सशक्त सेवक बताया। डॉ० मीना कौल ने कहा कि डॉ० मनोज रस्तोगी मुरादाबाद की साहित्यिक विरासत को सहेजने का बहुमूल्य कार्य कर रहे हैं। श्री अशोक विश्नोई जी ने कहा कि संस्था के संस्थापक स्व० राजेन्द्र मोहन शर्मा श्रृंग जी के हिन्दी के लिए किये गए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता, उन्होंने अनेक रचनाकारों को प्रकाश में लाने का कार्य किया है।

      इसके पश्चात कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जितेन्द्र कुमार जौली, नेपाल सिंह पाल, मोनिका मासूम, हेमा तिवारी भट्ट, मीनाक्षी ठाकुर, रामवीर सिंह वीर, अशोक विद्रोही, वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी, अजय अनुपम, राशिद मुरादाबादी, शिशुपाल मधुकर, मनोज मनु, ज़िया जमीर, योगेन्द्र वर्मा व्योम, रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ, मयंक शर्मा, संजय शर्मा, मुकुल मिश्रा, गरिमा शंखधार, मक्खन मुरादाबादी, रामदत्त द्विवेदी, अशोक विश्नोई, मीना कॉल, राजीव प्रखर, माहेश्वर तिवारी, मनोज रस्तोगी आदि ने काव्य पाठ किया।

रविवार, 3 फ़रवरी 2019

.....पांच लाख तक छूट है, उससे ऊपर लूट

हिन्दी साहित्य संगम की काव्य-गोष्ठी में कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएँ 

        दिनांक 3 फरवरी, 2019 को  साहित्यिक संस्था, 'हिंदी साहित्य संगम के तत्वावधान में  एक काव्य-गोष्ठी का आयोजन, मिलन विहार स्थित मिलन धर्मशाला में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया।
काव्य पाठ करते हुए डाॅ0 मनोज रस्तोगी 
        राजीव प्रखर ने "जाने कब से चमक रहे हैं, नभ में हम चन्दा औ' तारे। असलम-राजा-जौन-गुरिन्दर, मिलकर खेलो साथ हमारे।" अशोक विश्नोई ने "चन्दा निकाला सफ़र को, ढूंढने प्यार की डगर को।।" ओंकार सिंह ओंकार ने " घरों को प्यार से अपने सजा लो, सुखी तुम अपने जीवन को बना लो।" जितेन्द्र कुमार जौली ने कर छूट पर कटाक्ष करते हुए सुनाया, "जुमलेबाजी लग रही, हमें आयकर छूट। पांच लाख तक छूट है, उससे ऊपर लूट।।"
        कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री ओंकार सिंह 'ओंकार' ने की। मुख्य अतिथि श्री अशोक विश्नोई एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती हेमा तिवारी भट्ट मंचासीन रहीं। माँ शारदे की वंदना श्रीमती हेमा तिवारी भट्ट ने प्रस्तुत की तथा संचालन जितेन्द्र कुमार 'जौली' ने किया।
       कार्यक्रम में अनिरुद्ध उपाध्याय 'आज़ाद', अरविन्द कुमार शर्मा 'आनंद', आवरण अग्रवाल 'श्रेष्ठ', प्रशान्त मिश्रा, मीनाक्षी ठाकुर, राजीव 'प्रखर', मोनिका 'मासूम', जितेन्द्र कुमार 'जौली', मनोज कुमार 'मनु', डॉ० मनोज रस्तोगी, योगेन्द्र वर्मा 'व्योम', रामदत्त द्विवेदी, हेमा तिवारी भट्ट, अशोक विश्नोई एवं ओंकार सिंह 'ओंकार' ने विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के अन्त में संस्था के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी ने आभार अभिव्यक्त किया। 

मंगलवार, 29 जनवरी 2019

जितेन्द्र कमल 'आनंद' और डॉ० मीना कौल को किया गया सम्मानित 

       दिनांक 27 जनवरी, 2019 को अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, मुरादाबाद की ओर से एम० आई० टी० सभागार, मुरादाबाद में एक सम्मान-समारोह एवं परिचर्चा का आयोजन हुआ। समारोह में रामपुर (उ०प्र०) के वरिष्ठ साहित्यकार श्री जितेन्द्र कमल 'आनंद' एवं मुरादाबाद (उ० प्र०) की वरिष्ठ रचनाकार डॉ० मीना कौल (प्राचार्या महाराजा हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज, मुरादाबाद) को क्रमश:  "साहित्य मनीषी सम्मान" एवं "साहित्य सुरसरि सम्मान" से अलंकृत किया गया। 


      दोनों विभूतियों को सम्मान स्वरूप सम्मान-पत्र, अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न एवं श्रीफल भेंट किये गये। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० रामानंद शर्मा ने की। मुख्य अतिथि डॉ० मक्खन 'मुरादाबादी' एवं विशिष्ट अतिथि डॉ० अजय 'अनुपम', डॉ० चंद्रभान सिंह यादव तथा डॉ० प्रेमवती उपाध्याय रहीं। माँ शारदे की वंदना डॉ० ममता सिंह ने प्रस्तुत की तथा संचालन श्री योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने किया।

     
     कार्यक्रम में दोनों सम्मानित विभूतियों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। तत्पश्चात् "संस्कृति के संरक्षण में साहित्यकार की भूमिका" विषय पर एक परिचर्चा भी हुई। 

      कार्यक्रम में ओंकार सिंह 'विवेक', रघुराज सिंह 'निश्चल', डॉ० कृष्ण कुमार 'नाज़', अशोक विश्नोई, उमाकांत गुप्ता, मंगलेश लता यादव, राजीव 'प्रखर', डॉ० सुगंधा अग्रवाल, राम वीर सिंह वीर, वीरेंद्र 'बृजवासी', शिशुपाल 'मधुकर', श्रीकृष्ण शुक्ल, राम दत्त द्विवेदी, डॉ० मनोज रस्तोगी, डॉ० सरिता लाल, ओंकार सिंह 'ओंकार', हेमा तिवारी, मोनिका 'मासूम', अशोक 'विद्रोही', डॉ० प्रदीप शर्मा, डॉ० तुषार अग्रवाल, विवेक निर्मल, आवरण अग्रवाल श्रेष्ठ, ईशांत शर्मा 'ईशू' सहित अनेक साहित्यकार/रचनाकार उपस्थित रहे। अंत में संस्था की मुरादाबाद शाखा की अध्यक्षा डॉ० प्रेमवती उपाध्याय द्वारा आभार-अभिव्यक्ति के साथ कार्यक्रम समापन पर पहुँचा।

रविवार, 6 जनवरी 2019

माँ-बाप की छवि में सदा भगवान को देखा करो


हिन्दी साहित्य संगम की कवि गोष्ठी में कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएँ

    दिनांक 6 जनवरी, 2019 को साहित्यिक संस्था 'हिन्दी साहित्य संगम' के तत्वावधान में  काव्य-गोष्ठी का आयोजन मिलन विहार, मुरादाबाद स्थित मिलन धर्मशाला में किया गया।
काव्य पाठ करते हुए राजीव प्रखर 

   कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ ग़ज़लकार श्री ओंकार सिंह 'ओंकार' ने की। मुख्य अतिथि श्री रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ तथा विशिष्ट अतिथि श्री शिशुपाल 'मधुकर' रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया। माँ शारदे की वंदना श्रीमती मोनिका 'मासूम' ने प्रस्तुत की तथा संचालन राजीव 'प्रखर' ने किया।

      राम सिंह निःशंक ने, "माँ-बाप की छवि में सदा भगवान को देखा करो, अन्तर्मन में छिपे इन्सान को देखा करो।"  जितेन्द्र कुमार जौली ने, "आता सबके काम है, कोई भी हो जोन। जीवन का इक अंग है, अब मोबाइल फोन। राजीव प्रखर ने, "मन की सच्ची भावना, धागों के भी पार। जब समझो तब हो गया, राखी का त्यौहार।।" अशोक विश्नोई ने, "धूप में सोता था, अपने गांव मे, आज! छाले पड़ गए हैं पांव में।" सुनाया।

       काव्य-पाठ के क्रम में आवरण अग्रवाल 'श्रेष्ठ', इशांत शर्मा 'ईशु', प्रदीप 'गुल, 'मोनिका 'मासूम', मीनाक्षी ठाकुर, जितेन्द्र कुमार जौली, हेमा तिवारी भट्ट, राजीव प्रखर, के० पी० 'सरल',  राम सिंह 'निशंक', योगेन्द्र वर्मा 'व्योम', डॉ० मनोज रस्तोगी, अशोक विश्नोई, योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई, राम दत्त द्विवेदी, शिशुपाल 'मधुकर', रामेश्वर वशिष्ठ एवं ओंकार सिंह 'ओंकार' ने विभिन्न सामाजिक मुद्दों से सम्बंधित रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के अंत में दिवंगत साहित्यकार श्री पुष्पेन्द्र वर्णवाल की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संस्था के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी द्वारा आभार-अभिव्यक्त किया गया।

शनिवार, 5 जनवरी 2019

वरिष्ठ साहित्यकार पुष्पेन्द्र वर्णवाल के निधन पर आयोजित की गई शोक सभा



      दिनांक 5 जनवरी, 2018 को मुरादाबाद  के वरिष्ठ साहित्यकार श्री पुष्पेन्द्र वर्णवाल के आकस्मिक निधन पर, साहित्यिक संस्थाओं - राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, हिन्दी साहित्य संगम, नवचेतना, विजय श्री वेलफेयर सोसायटी, अक्षरा, जायसी साहित्यिक मंच, काव्य सुधा साहित्यिक मंच, हस्ताक्षर, अखिल भारतीय साहित्य परिषद आदि की ओर से, लाइन पर स्थित विश्नोई धर्मशाला में शोक सभा हुई।



       इस अवसर पर उपस्थित स्थानीय साहित्यकारों द्वारा दिवंगत साहित्यकार श्री पुष्पेंद्र वर्णवाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा करते हुए कहा गया कि श्री पुष्पेंद्र वर्णवाल एक बड़े रचनाकार तो थे ही, प्रखर इतिहासकार एवं पुरातत्त्ववेत्ता भी थे। उन्होंने अनेक खंडकाव्य, महाकाव्य एवं उपन्यास लिखे तथा हिन्दी साहित्य में विगीत नामक नई विधा का प्रवर्तन भी किया। पुष्पेन्द्र जी के निधन से हिन्दी साहित्य की बहुत बड़ी क्षति हुई है, जिसकी प्रतिपूर्ति संभव नहीं है। अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत  साहित्यकार को श्रद्धांजलि दी  गई।

      इस अवसर पर योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई, रामेश्वर वशिष्ठ, अनिल कांत, योगेन्द्र वर्मा 'व्योम', राजीव 'प्रखर', डॉ० अजय 'अनुपम', डॉ० प्रेमवती उपाध्याय, अशोक विश्नोई, शिशुपाल 'मधुकर', राम सिंह निशंक, डॉ० मनोज रस्तोगी, डॉ० एम० पी० बादल 'जायसी', रघुराज सिंह 'निश्चल' आदि उपस्थित रहे। शोक सभा का संचालन राम सिंह निशंक ने किया।

बाल साहित्य साधक सम्मान से सम्मानित किए गए सरस

बाल साहित्य साधक सम्मान से सम्मानित किए गए सरस

       दिनांक 4 जनवरी, 2019 को नवोदित साहित्यिक संस्था 'हस्ताक्षर' के तत्वावधान में, मुरादाबाद के वरिष्ठ बाल साहित्यकार श्री शिव अवतार 'सरस' के आवास पर, सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें मुरादाबाद के अति बुज़ुर्ग साहित्यकारों को उनके जन्मदिन पर, उनके आवास पर सम्मानित किए जाने की श्रृंखला के आरंभ में, मुरादाबाद के वरिष्ठ बाल साहित्यकार श्री शिव अवतार 'सरस' को उल्लेखनीय बाल साहित्य-सृजन के लिए प्रतीक चिन्ह, अंग-वस्त्र, मान-पत्र एवं श्रीफल भेंट कर 'बाल साहित्य साधक सम्मान' से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० माहेश्वर तिवारी ने की। मुख्य अतिथि डॉ० रामानंद शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि डॉ० मक्खन 'मुरादाबादी' रहे। संचालन योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने किया एवं आभार-अभिव्यक्ति राजीव 'प्रखर' द्वारा की गई।


       इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों/रचनाकारों ने श्री सरस जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए, उनके साहित्यिक योगदान व समर्पण को व्यक्त किया। श्री सरस जी की प्रकाशित कृतियों में, 'नोंकझोंक', 'अभिनव मधुशाला', 'सरस संवादिकाएं', 'नई उमंग', 'पर्यावरण पचीसी' आदि बाल-साहित्य में काफ़ी चर्चित रही हैं। इस अवसर पर श्री सरस जी ने अपनी कुछ रचनाओं का पाठ भी किया।

       कार्यक्रम में हेमा तिवारी भट्ट, मोनिका 'मासूम', राजीव 'प्रखर' योगेन्द्र वर्मा 'व्योम', अशोक विश्नोई, डॉ० प्रेमवती उपाध्याय, डॉ० कृष्ण कुमार 'नाज़', श्री विश्व अवतार जैमिनी, काव्य सौरभ रस्तोगी, ओंकार सिंह 'ओंकार', डॉ० अर्चना गुप्ता, श्रीकृष्ण शुक्ल, शिशुपाल मधुकर, रामदत्त द्विवेदी, डॉ० मक्खन 'मुरादाबादी' आदि ने भी काव्य पाठ किया।

रविवार, 4 फ़रवरी 2018

निर्झरिणी पत्रिका के डाॅ० कृष्ण कुमार नाज़ पर केन्द्रित विशेषांक का किया गया लोकार्पण 

     दिनांक 4 फरवरी, 2018 को मुरादाबाद की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था 'हिन्दी साहित्य संगम' के तत्वावधान में "लोकार्पण समारोह एवं काव्य-गोष्ठी" का आयोजन मिलन विहार, मुरादाबाद स्थित आकांक्षा विद्यापीठ इण्टर काॅलेज में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया। इसके पश्चात आनन्द कुमार गौरव ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की।



       कार्यक्रम में मुरादाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ कृष्ण कुमार 'नाज़' के व्यक्तित्व व कृतित्व पर केन्द्रित बरेली से प्रकाशित पत्रिका 'निर्झरिणी' के ताज़ा जनवरी 2018 अंक का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध नवगीतकार डॉ माहेश्वर तिवारी ने की, मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं हिन्दू स्नातकोत्तर महाविद्यालय मुरादाबाद के पूर्व प्राचार्य डॉ रामानंद शर्मा व विशिष्ट अतिथि सुविख्यात हास्य-व्यंग्य कवि डॉ मक्खन मुरादाबादी रहे। कार्यक्रम का संचालन योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने किया। आभार अभिव्यक्ति संस्था के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी ने प्रस्तुत की।

       कार्यक्रम में स्थानीय साहित्यकार सर्वश्री डॉ चन्द्रभान सिंह यादव, अशोक विश्नोई, डॉ अर्चना गुप्ता, डॉ पूनम बंसल, डॉ मनोज रस्तोगी, राजीव प्रखर, जितेन्द्र कुमार जौली, श्रीकृष्ण शुक्ल, के०पी०सरल, अम्बरीष गर्ग, मनोज मनु, मोनिका मासूम, हेमा तिवारी भट्ट, रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ, डॉ प्रदीप रस्तोगी, विनोद भावुक, शरर हसनपुरी, ख्याल मुरादाबादी, प्रशान्त मिश्र, प्रदीप कुमार सिंह, सुमित सिंह आदि उपस्थित रहे।

भोपाल में सम्मानित किए गए योगेन्द्र वर्मा व्योम 

      दिनांक 23 जनवरी, 2018 को मध्य प्रदेश की प्राचीनतम एवं प्रतिष्ठित साहित्य, संगीत व कला को समर्पित संस्था 'अभिनव कला परिषद्' द्वारा भोपाल में आयोजित अपने 55वें वार्षिक समारोह 'कला पर्व-उत्सव गणतंत्र' में गीत-नवगीत तथा समीक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सृजन के लिए योगेन्द्र वर्मा व्योम जी को "अभिनव शब्द शिल्पी अलंकरण" से सम्मानित किया गया। 



        कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, विशिष्ट अतिथि सांसद आलोक संजर व आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे एवं संस्था के संस्थापक महासचिव सुरेश तांतेड़ द्वारा अंगवस्त्र ओढाकर तथा प्रतीकचिन्ह, सम्मानपत्र व श्रीफल भेंट किया गया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में स्वतंत्रता आंदोलन के 90 वर्षों के संघर्ष पर केन्द्रित डॉ रामबल्लभ आचार्य द्वारा लिखित काव्य-रूपक "मुक्ति का महायज्ञ" की साभिनय संगीतमय प्रस्तुति प्रसिद्ध रंगकर्मी मोहन द्विवेदी के निर्देशन में लगभग तीन दर्जन कलाकारों द्वारा भव्य रूप में प्रस्तुत की गई। 

         कार्यक्रम में भोपाल के अनेक साहित्यकार सर्वश्री यतीन्द्रनाथ राही, कृष्ण बक्षी, दिनेश प्रभात, विनोद निगम, शिव कुमार अर्चन, नरेन्द्र दीपक , ज़हीर कुरैशी, मनोज जैन मधुर, डॉ मधु शुक्ला, डॉ संध्या सिंह आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कमलेश जैमिनी ने किया।

रविवार, 21 जनवरी 2018

भोपाल में सम्मानित होंगे योगेन्द्र वर्मा व्योम 

अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान से किया जाएगा सम्मानित

     हिन्दी साहित्य संगम के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी जी ने बताया कि 23 जनवरी, 2018 को भोपाल में आयोजित होने वाले अभिनव कला परिषद् के कार्यक्रम में मुरादाबाद के नवगीतकार एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री योगेन्द्र वर्मा व्योम को अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह मुरादाबाद शहर के लिए गौरव का विषय है।


       इस सामान की जानकारी संस्था के संयोजक रामवल्लभ आचार्य ने पत्र भेजकर हिन्दी साहित्य संगम के अध्यक्ष को दी है। सम्मान की जानकारी मिलने पर ओंकार सिंह ओंकार, राजीव प्रखर, कृष्ण कुमार नाज़, वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी, विवेक निर्मल, जितेन्द्र कुमार जौली आदि रचनाकारों ने योगेन्द्र वर्मा व्योम जी को बधाई दी।

शनिवार, 20 जनवरी 2018

राकेश चक्र की पुस्तक अपनी धार खुद बनाना का किया गया लोकार्पण

        दिनाँक 14 जनवरी, 2018 को  मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था 'राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति' के तत्वावधान में मकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर लाइनपार , मुरादाबाद स्थित विश्नोई धर्मशाला में लोकार्पण समारोह एवं काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया। 



        इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० राकेश चक्र की कृति "धार अपनी खुद बनाना" का लोकार्पण हुआ। डॉ० महेश दिवाकर, श्री शचीन्द्र भटनागर तथा योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने कृति के संदर्भ में समीक्षात्मक उदबोधन प्रस्तुत किया। लोकार्पण के पश्चात कवि गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में उपस्थित कवियों ने सामाजिक, राजनैतिक आदि विषयों पर अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। 

       कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रमेश यादव ने की, मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार श्री शचीन्द्र भटनागर तथा विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० महेश दिवाकर रहे। संचालन कवि श्री राम सिंह निशंक ने किया। इस अवसर पर सर्वश्री अशोक विश्नोई, विवेक निर्मल, राजीव प्रखर, रामदत्त द्विवेदी, रामेश्वर वशिष्ठ, राजेश्वर प्रसाद गहोई, मोनिका मासूम सहित अन्य अनेक स्थानीय साहित्यकार उपस्थित रहे। आभार अभिव्यक्ति संस्था के अध्यक्ष श्री योगेन्द्रपाल सिंह विश्नोई ने प्रस्तुत की।

अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी दिवस पर किया गया आर०सी० शुक्ला को सम्मानित

.....सर्दी भी लिखने लगी, ठिठुरन वाले गीत

हिन्दी साहित्य संगम की काव्य-गोष्ठी में कवियों ने किया काव्यपाठ 

          दिनाँक 7 जनवरी, 2018 को हिन्दी साहित्य संगम के तत्वावधान में  मासिक काव्य-गोष्ठी का आयोजन मिलन विहार, मुरादाबाद स्थित मिलन धर्मशाला में किया गया। कार्यक्रम की  अध्यक्षता श्री योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई ने की, मुख्य अतिथि डॉ. चन्द्रभान सिंह एवम् विशिष्ट अतिथि श्री रमेश यादव 'कृष्ण' रहे। माँ शारदे की वंदना राजीव 'प्रखर' ने प्रस्तुत की, जबकि कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रूप से राजीव 'प्रखर' एवम् जितेन्द्र कुमार 'जौली' द्वारा किया गया l



         जितेन्द्र कुमार 'जौली' ने मोबाइल का महत्त्व बताते हुए सुनाया, "सबका देता साथ है, कोई भी हो जोन। जीवन का इक अंग है, अब मोबाइल फ़ोन।" आवरण अग्रवाल 'श्रेष्ठ' ने "सुस्वागतम्, सुस्वागतम् नववर्ष सुस्वागतम्।" राजीव 'प्रखर' ने "चले गगन से खेलकर, जब वापस दिनमान। बोले, अब से भोर तक, चन्दा तू कप्तान।" सर्वेन्द्र सिंह ने "भूखों को तुम भोजन बाँटो, कपड़े बाँटो नंगों को।
मेरा तिरंगा बोल रहा है, मत काटो मेरे अंगों को।" अटल बागी ने "भीषण गर्जना दहाड़ करें। आओ, सिंहनाद करे।" प्रदीप सिंह 'गुल' ने "माँ तेरे आँचल में, मैंने बचपन संभाला है।" हेमा तिवारी भट्ट ने "नाचती ता थैय्या काल की करताल में। मना रही जश्न पर घिरी हूँ सवाल में।सोच रही हूँ क्या होगा नये साल में ?"

         योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने "कुहरे ने जब धूप पर, पाई फिर से जीत। सर्दी भी लिखने लगी, ठिठुरन वाले गीत।" रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ ने "तुम निराशा दो मुझे, विश्वास लेकर क्या करूँगा। जब दीप ही मेरा नहीं, प्रकाश लेकर क्या करूँगा।" रामदत्त द्विवेदी ने "फूल तोड़ जो डाले हमने,  मस्जिद की दीवारों पर। जाने कैसे वे मन्दिर की, मूरत पर चढ़ जाते हैं।"

          इसके अतिरिक्त श्री रमेश यादव 'कृष्ण', डॉ. चन्द्रभान सिंह, श्री योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई आदि ने, विभिन्न सामाजिक विषयों पर रचनाएँ प्रस्तुत की। संस्था के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी द्वारा कार्यक्रम के अन्त में आभार व्यक्त किया गया।

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

गीत संग्रह बैरन भई बाँसुरी का किया गया लोकार्पण 

         दिनांक 10 दिसम्बर, 2017 को श्री गोविन्द हिन्दी सेवा समिति के तत्वाधान में गोविन्द कुटीर, हरथला, मुरादाबाद में लोकार्पण समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ ज्ञान की देवी माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया। कार्यक्रम में रामवीर सिंह 'वीर' के गीत संग्रह 'बैरन भई बाँसुरी' का लोकार्पण किया गया 



        इसके पश्चात कार्यक्रम में उपस्थित कवियों ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत की।  विवेक 'निर्मल' ने "हादसों में कटी जिंदगी, लम्हा लम्हा घटी जिंदगी।" राजीव 'प्रखर' ने "जात-पात और भेदभाव से अब लड़ने की बारी है। उठो साथियों आजादी की जंग अभी भी जारी है।" श्री कृष्ण शुक्ल ने "अब तो चलनी चाहिए, कोई ऐसी रीत। तज के मिथ्या दंभ को, सभी निभाए प्रीत।" आफरीन ने "जिंदगी जीना आसान नहीं होता, बिना मेहनत कोई काम नहीं होता।" राजीव सक्सेना ने "गाँव-गाँव छिड़े है दंगल, शहर बने नालों के जंगल।"

        कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री आर० सी० शुक्ला ने की। मुख्य अतिथि डॉ० राजीव सक्सेना तथा विशिष्ट अतिथि डॉ० महेश दिवाकर एवं अशोक विश्नोई रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री अमरीश गर्ग ने किया। इस अवसर पर उदय प्रकाश सकसेना 'अस्त', योगेन्द्र वर्मा 'व्योम', डॉ० महेश दिवाकर, अशोक विश्नोई लोग उपस्थित रहे।

सोमवार, 4 दिसंबर 2017

.......मेरे घर का पता कुछ और बतलाया गया उनको

हिन्दी साहित्य संगम द्वारा योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई को किया गया सम्मानित

      दिनाँक 3 दिसम्बर, 2017 को हिन्दी साहित्य संगम के तत्वावधान में मिलन विहार मुरादाबाद स्थित आकांक्षा विद्यापीठ इंटर कॉलेज में सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया। तत्पश्चात श्री वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी जी ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। 



      कार्यक्रम में हिन्दी साहित्य संगम के संस्थापक स्व० श्री राजेन्द्र मोहन शर्मा श्रृंग जी की चतुर्थ पुण्यतिथि पर उनकी पावन स्मृति में मुरादाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार श्री योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई जी को राजेंद्र मोहन शर्मा श्रृंग स्मृति साहित्य साधक सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप इन्हे मान-पत्र, प्रतीक-चिन्ह, अंग-वस्त्र एवं नकद राशि प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० महेश दिवाकर ने की। मुख्य अतिथि श्री अशोक विश्नोई एवं विशिष्ट अतिथि श्री वीरेंद्र सिंह ब्रजवासी जी रहे। कार्यक्रम का संचालन योगेन्द्र वर्मा व्योम तथा राजीव प्रखर ने संयुक्त रुप से किया।



       सम्मान की प्रक्रिया के पश्चात काव्य संध्या आरम्भ हुई। राजीव 'प्रखर' ने, "हरे-भरे इक पेड़ से मिलती, हमको शीतल छाया है। लगता ऐसा, सर पर अपने, बाबू जी का साया है।" अम्बरीष गर्ग ने "सच बोलूं, तो, मुझे किसी का ध्यान नहीं आया। कठिन वक्त में, माँ आई, भगवान नहीं आया।" अशोक विद्रोही ने "अंधेरों में उजालों के लिए कुछ दीप जलते हैं, महक अपनी लुटाने को चमन में फूल खिलते हैं।" विकास मुरादाबादी ने "कांग्रेस अरु भाजपा, लगी हुई दिन-रात। पता नहीं इस बार यह, किसका हो गुजरात।।" विवेक निर्मल ने "रात भर दीप जलता रहा। यह अंधेरों को खलता रहा।" मोनिका शर्मा मासूम ने "जुबां पर आजकल सबके चढ़ी सरकार की बातें, कलम की नोक तक आने लगीं तलवार की बातें।"


 
      जितेन्द्र कुमार जौली ने "रिश्वत के इस जाल में, फँसा पड़ा है मुल्क। रिश्वतखोरी बन गया, अब तो सुविधा शुल्क।।" हेमा तिवारी भट्ट में "निराशा दिलों की हटाएं चलो, अंधेरों में दीपक जलाएं चलो।" रामदत्त द्विवेदी ने "बहुत किया मंथन तभी, पाया हूँ यह खोज। हर उन्नति के मूल में, छिपी से श्रेष्ठ है सोच।।" के० पी० सिंह 'सरल' ने "आतंकी हालातों ने सब को पत्थर बना दिया है, साँसो पर मृत्यु का पहरा हर दिल डर को बसा दिया है।" रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ ने "अब नही गफलत है पहली से हिंदुस्तान में, अब न  कुछ कहना तू मेरे वतन की शान में।" श्रीकृष्ण  शुक्ल ने "नित्य होम श्वासों का करता हूँ, नित्य ही जीता, नित्य ही मरता हूँ।"

        डॉ० रामवीर सिंह वीर में "मेरे हरे-भरे उपवन को जाने किसकी नजर लगी, भाईचारे के आंगन में घृणा की दीवार लगी।" योगेन्द्र वर्मा व्योम ने "छँटा कुहासा मौन का, निखरा मन का रूप। रिश्तो में जब खिल उठी, अपनेपन की धूप।" शिशुपाल मधुकर ने "बहारें रास्ता भूली कि भटकाया गया उनको, मेरे घर का पता कुछ और बतलाया गया उनको।" अशोक विश्नोई ने "घुटनों के बल चलो, खड़े हो जाओगे। लक्ष्य अपना कभी तो पा ही जाओगे।" वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी ने "गंगा जल से निर्मल मन का, बोलो कोई क्या कर लेगा, कोई उसको क्या दे देगा, कोई उससे क्या हार लेगा।" डॉ० महेश दिवाकर ने "गुरु शिष्य सम्बन्ध है, संस्कृति का सम्मान। ध्रुव तारा यदि शिष्य है, तो गुरु है दिनमान।।" आफरीन ने "ईमान को नीलाम होते देखा है, शहरों को वीरान होते देखा है।" प्रदीप शर्मा विरल ने "घोर निराशा में खुशियों के गीत सुनाता हूँ,अँधियारे को दूर करे वो दीप जलाता हूँ।"  कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी जी ने कार्यक्रम में आए हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।



सोमवार, 4 सितंबर 2017

कौन जानता कितनी रातें, सोए नहीं पिता.....

हिन्दी साहित्य संगम की कवि गोष्ठी में कवियों ने व्यक्त किए हृदय के उद्गार 

         हिन्दी साहित्य संगम के तत्वावधान में दिनाँक 3 सितम्बर, 2017 को मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन मिलन विहार, मुरादाबाद स्थित मिलन धर्मशाला में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।



          जितेन्द्र कुमार जौली ने अपनी कविता इस प्रकार प्रस्तुत की "फैशन के इस दौर ने, ऐसा किया कमाल। गंजे आज उगा रहे, अपने सिर पर बाल।।" रामसिंह नि:शंक ने "आओ इस देश के विकास में कुछ योगदान करें। पहले दूजों का करें फिर अपना भी कल्याण करें।।" अशोक विद्रोही ने "देखो! देखो! भारत वीरो बौनी सेना आती है। उसे दिखाना भारत की अब 56 इन्ची की छाती है।।" के०पी० सिंह सरल ने "आनन आच्छादित अलक, जलज मधुप आकीर्ण। क्यों पूनम की चाँदनी, बदली करे विदीर्ण।।" राजीव प्रखर ने "इक पौधा रोपा क्यारी में, मुझको भी यह अहसास हुआ। जो अचल-अटल-अविनाशी है, वह कितना मेरे पास हुआ।।" आशुतोष कुलश्रेष्ठ ने "महिला हो वीरांगना हो, क्यों प्रताड़ित फिर भी हो। वेदना दुःख एक बराबर, क्यों ये पीड़ा तुम सहो।।" अखिलेश वर्मा ने "खो दिया जिसने भी भरोसा तो दूर तक वह चला नहीं करता।।" 



       हेमा तिवारी भट्ट ने "एक जंग सीमा पर है, एक जंग सीमा भीतर। वह शत्रु सामने है, यह शत्रु ने दिखे पर।।" डॉ० मनोज रस्तोगी ने "यह सोच कर उदास हैं चौराहों पर लगे बुत, हमारे शहर में वो लहु बहाने निकल पड़े हैं।।" शचीन्द्र भटनागर ने "हम मशालें हाथ में लेकर चले हैं, अब अँधेरे रह ना पाएँगे धरा पर।।" ओंकार सिंह ओंकार ने "जाति मजहब धर्म के झगड़े मिटाने के लिए। आओ! सोचें बीच की दीवार ढाने के लिए।।" रामदेव द्विवेदी ने "हाल और चाल सभी पूछते हैं सबसे यहाँ, टूटे दिलों का मगर कोई भी हमदर्द नही।"  योगेन्द्र वर्मा व्योम ने "बाँसुरी का साथ स्वर से छुट रहा है, भावनाओं का यहाँ दम घुट रहा है। खो गया है आपसी हँसना-हँसाना, नित्य पीड़ा का खजाना लुट रहा है।।" अम्बरीश गर्ग ने "यों तो छुटकी की शादी पर, रोये नहीं पिता। कौन जानता कितनी रातें, सोए नहीं पिता।।" डॉ० महेश दिवाकर ने "रूप बदलकर भेड़िए, पहुँच रहे दरबार। राजा जी हर्षित बड़े, बाँट रहे उपहार।।" प्रशांत मिश्रा ने "छोटी-छोटी खुशियाँ मन महकाती हैं, धीरे-धीरे से दिल में उतर जाती हैं।।" आवरण अग्रवाल 'श्रेष्ठ' ने "कितनी खूबियाँ है मुझमें, मैं कभी समझ नहीं पाया। मैं अपनी उपलब्धियों को कभी गिन नहीं पाया।।"

        कार्यक्रम की अध्यक्षता शचीन्द्र भटनागर ने की। मुख्य अतिथि श्री ओंकार सिंह ओंकार तथा विशिष्ट अतिथि श्री के०पी० सिंह 'सरल' रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री राजीव प्रखर ने किया और सरस्वती वन्दना श्री राम सिंह नि:शंक ने प्रस्तुत की।

बुधवार, 30 अगस्त 2017

माहेश्वर तिवारी के साहित्य से लोगों ने किया संवाद

          दिनांक 30 अगस्त, 2017 को दैनिक जागरण, मुरादाबाद की ओर से रामगंगा विहार, मुरादाबाद स्थित एम०आई०टी० के सभागार में 'साहित्य से संवाद' नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम यश भारती से सम्मानित मुरादाबाद के सुप्रसिद्ध नवगीतकार श्री माहेश्वर तिवारी जी पर केन्द्रित था। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित करके किया गया।


  
          दैनिक जागरण की ओर से उन्हें सम्मान के रूप में शॉल, प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। छात्राओं की ओर से मां शारदे की संगीतमयी वंदना की प्रस्तुति के बाद नवगीतगार माहेश्वर तिवारी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा शुरू हुई। माहेश्वर तिवारी जी ने अपनी  रचनाओं का सस्वर पाठ किया। तिवारी जी ने अपनी कविता 'धूप में जले जब भी पांव घर की याद आई, घर के झूठे बासन बोले सुबह हो गई, डायरी में अंगुलियों के फूल से, नाम लिख गया भूल से' सुनाई। इन कविताओं को सुनकर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। 



         काव्यपाठ के बाद माहेश्वर तिवारी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा की शुरुआत साहित्यकार योगेन्द्र वर्मा व्योम ने की। इसके बाद कृष्ण कुमार नाज, अजय अनुपम, मक्खन मुरादाबादी ने आलेख पढ़े तथा हेमा तिवारी भट्ट ने तिवारी जी के सन्दर्भ में लिखी कविता प्रस्तुत की। शायर मंसूर उस्मानी व जमीर दरवेश ने भी भावपूर्ण ढंग से तिवारी के व्यक्ति्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला।



        मंडलायुक्त एल वेंकटेश्वर लू ने कहा कि आधुनिक युग में युवा वर्ग पर नकारात्मक चीजें हावी हो रही हैं। साहित्यकारों को इसे गंभीरता से लेना होगा। इस दौर में जागरण ने बौद्धिक क्षमता के विकास को लेकर नई पहल शुरू की है। ऐसे ही प्रयासों से रचनात्मकता बढ़ेगी और समाज से असमानता दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि समाज और देश को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि जात-पात, छुआ-छूत और गरीबी को दूर करने की मजबूत पहल की जाए। साहित्यकारों को इस चुनौती को स्वीकार करना चाहिए। अपने लेखन से वे समाज को नई दिशा दे सकते हैं और कुरीतियों को खत्म करने में बड़े मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने माहेश्वर तिवारी की प्रसंशा करते हुए कहा कि अभी तक मैं सिर्फ उनकी कविताओं की चर्चा सुनता था, लेकिन यह पहला मौका है जब उन्हें प्रत्यक्ष रूप से कविता पाठ करते हुए देखा। विशिष्ट अतिथि डीआइजी ओंकार सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में सृजनात्मक क्षमता का विकास थम सा गया है। लोग इधर-उधर की बातों पर अधिक ध्यान देते हैं, जिससे असल मुद्दे गायब हो जाते हैं। हमें युवा पीढ़ी में यह भाव भरने की जरूरत है कि वे देश व समाज को मजबूत बनाने की अपनी जिम्मेदारी समझें।



         उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि दैनिक जागरण के कार्यक्रम में पहली बार इतना जनसमूह देखकर यह महसूस हो रहा है कि साहित्य प्रेमियों की कहीं कमी नहीं है। जागरण के प्रयास की जितनी सराहना की जाए कम है। इससे पहले संपादकीय प्रभारी संजय मिश्र ने अतिथियों का स्वागत करते कहा कि साहित्य से संवाद कार्यक्रम की शुरुआत करने के पीछे दैनिक जागरण का उद्देश्य यहां के साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों को उचित मंच देने का है। मुझे भरोसा है कि आज से शुरू हुई विमर्श की यह परंपरा मजबूती से आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि नवगीतकार माहेश्वर तिवारी समूचे देश के मंचों पर सुने और सराहे जाते हैं। वे ऐसे विरले शख्सियत हैं, जिन्होंने पूर्वाचल और पश्चिमांचल को एक सूत्र में पिरोने का सराहनीय कार्य किया है।

        कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दू कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामानंद शर्मा ने की। मुख्य अतिथि मंडलायुक्त एल वेंकटेश्वर लू, विशिष्ट अतिथि डी०आई०जी० ओंकार सिंह, शायर जमीर दरवेज रहे। कार्यक्रम का संचालन मनोज रस्तोगी ने किया।

         कार्यक्रम में अशोक विश्नोई, अतुल जौहरी, डॉ० अजय 'अनुपम', ओमकार सिंह 'ओकार', कृष्ण कुमार 'नाज', जितेन्द्र कुमार 'जौली', जमीर दरवेश, जिया जमीर, परशुराम 'नया कबीर', पूनम बंसल, डॉ० प्रेमावती उपाध्याय, फक्कड़ मुरादाबादी, मक्खन मुरादाबादी, मनोज रस्तौगी, डॉ० मीना नकवी, मनोज 'मनु', मंसूर उस्मानी, योगेंद्र पाल सिंह विश्नोई, योगेन्द्र वर्मा 'व्योम', रामदत्त द्विवेदी, रामेश्वर प्रसाद 'वशिष्ठ', डॉ० राकेश 'चक्र',  रामसिंह 'निःशंक', विकास मुरादाबादी,  विवेक 'निर्मल', वीरेन्द्र सिंह 'ब्रजवासी', शिशुपाल 'मधुकर', शचीन्द्र भटनागर, के०पी० सिंह 'सरल', राजीव प्रखर, हेमा तिवारी भट्ट, अर्चना गुप्ता, मोनिका मासूम, प्रदीप शर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।

रविवार, 27 अगस्त 2017

वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी को किया जाएगा सम्मानित 

        दिनाँक 27 अगस्त, 2017 को हिन्दी साहित्य संगम की कार्यकारिणी की बैठक मिलन विहार, मुरादाबाद स्थित, मिलन धर्मशाला में आयोजित की गई।


        बैठक में हिन्दी दिवस (14 सितम्बर) को धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया। संस्था के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी जी ने बताया कि गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर हिन्दी दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। बैठक में हिन्दी दिवस के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई।
         बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष मुरादाबाद के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी जी को 'हिन्दी साहित्य गौरव' सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर दिनाँक 13 सितम्बर, 2017 को आकांक्षा विद्यापीठ, मिलन विहार, मुरादाबाद में किया जाएगा।
         बैठक की अध्यक्षता श्री रामदत्त द्विवेदी जी ने तथा संचालन संस्था के महासचिव जितेन्द्र कुमार जौली ने किया। बैठक में श्री ओमकार सिंह ओंकार, योगेन्द्र वर्मा व्योम, राजीव प्रखर, हेमा तिवारी भट्ट, प्रदीप शर्मा, के०पी० सिंह सरल आदि लोग उपस्थित रहे।

शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

बृजभूषण सिंह गौतम अनुराग को दी गई श्रद्धांजलि

      दिनाँक 18 अगस्त, 2017 ई० को हिन्दी साहित्य संगम के तत्वाधान में मिलन विहार मुरादाबाद स्थित मिलन धर्मशाला में मुरादाबाद के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, महाकवि श्री बृजभूषण सिंह गौतम अनुराग जी के आकस्मिक निधन पर शोक सभा आयोजित की गई।



       इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि "अनुराग जी अद्भुत रचनाकार थे, उनके द्वारा रचित गीत, गजलें, कहानियाँ, महाकाव्य, दोहे सहित समग्र रचनाकर्म रचनाकर्म हिन्दी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। 'अनुराग' जी दैहिक रूप से भले ही हमारे मध्य आज नहीं हों किन्तु अपनी रचनाओं के रूप में सदैव हमारे मध्य बने रहेंगे।"



        ब्रजभूषण सिंह गौतम अनुराग जी का निधन 84 वर्ष की आयु में 17 अगस्त, 2017 ई० को हो गया था। उन्होंने अपने जीवन काल में तीन दर्जन से अधिक पुस्तके लिखी लिखीं। आँसू, हिन्दुत्व विनाश की ओर, दर्पन मेरे गाँव का, चाँदनी, धूप आती ही नही, सोनजुही की गन्ध, आँगन में सोनपरी, अपने-अपने सूरज, साँसो की समाधि, चन्दन वन सँवरें, एक टुकड़ा आसमान, आँगन से आकाश तक आदि उनकी कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उन्हे 'दर्पन मेरे गाँव का' महाकाव्य के लिए 15,000 रुपये तथा उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा 'चाँदनी' महाकाव्य के लिए 8,000 रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हे दो दर्जन से अधिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया।

        इस अवसर पर राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, अंतर्राष्ट्रीय साहित्य कला मंच, अक्षरा, सुकाव्य प्रेरणा मंच, परमार्थ, संकेत, श्री गोविन्द हिन्दी साहित्य सेवा समिति आदि संस्थाओं के प्रतिनिधियों साहित्य श्री रामदत्त द्विवेदी, जितेन्द्र कुमार जौली, योगेन्द्र वर्मा व्योम, राजीव प्रखर, शिशुपाल मधुकर, अशोक विश्नोई, ओमकार सिंह ओंकार, विवेक निर्मल, के० पी० सिंह सरल, सतीश गुप्ता फ़िगार, विकास मुरादाबादी, योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई, वीरेन्द्र सिंह बृजवासी, रमेशचंद्र यादव कृष्ण, हेमा तिवारी भट्ट, महेश दिवाकर, रामवीर सिंह वीर, अंकित गुप्ता अंक, अशोक विद्रोही, आर० एल० शुक्ला आदि लोग उपस्थित रहे। 

       श्रद्धांजलि सभा के अंत में 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।