सोमवार, 22 अगस्त 2016

हेमा तिवारी भट्ट की लघु कथा : 'जहर'

जहर (लघु कथा)


"मनु और मीनू! यहाँ आओ बेटा जल्दी से भगवान जी का प्रसाद ले लो।" "नहीं माँ,मुझे नहीं खाना" नन्हा मनु मुँह बिगाड़ता हुआ बोला"और मुझे भी नहीं खाना मेरा अभी मन नहीं कर रहा है।"कहते हुए मीनू ने भी अपनी बात जोड़ी। संस्कारी राधा को अपने बच्चों का प्रसाद के लिए इस तरह मना करना बड़ा अटपटा लगा उसने प्रसाद की थाली मेज पर रखी और दोनों बच्चों को प्यार से अपने पास बुलाकर समझाया" देखो बच्चों कभी भी प्रसाद के लिए मना नहीं करते। प्रसाद में भगवान का आशीर्वाद होता है| चाहे थोड़ा-सा ही खाओ, पर माथे से लगाकर भगवान का धन्यवाद करना न भूलो"।  बच्चे माँ को बहुत ध्यान से सुन रहे थे इसलिए बालमन पर और गहरी छाप छोड़ने के लिए माँ ने जोर देकर कहा," जब हम भगवान का प्रसाद खाते हैं तो वह हमसे बहुत खुश होते हैं और हम जो भी चाहते है वह हमें तुरन्त मिल जाता है। हमें कभी प्रसाद का अनादर नहीं करना चाहिए, वरना भगवान हमसे नाराज हो जाते हैं।"  "अच्छा माँ,ऐसी बात है तो आप मुझे जल्दी से प्रसाद दे दो। मैं तो जरूर प्रसाद खाऊँगी और कभी प्रसाद के लिए मना नहीं करूँगी" बड़ी मीनू ने यह कहकर अपने को समझदार दिखाया तो छोटे मियाँ मनु भी कहाँ पीछे रहते उन्होंने भी झट माँ से प्रसाद माँग लिया और प्रसाद बँधी अंजुलि को माथे से लगाकर माँ को आँखों की कोर से देखा। माँ बड़ी खुश हुई आखिर उसने अपने छोटे-छोटे से बच्चों को एक अच्छी आदत सीखा दी थी।

राधा बरामदे में बैठी अखबार पढ़ रही थी| अखबार पढ़ते पढ़ते अचानक उसके चेहरे पर बेचैनी के भाव आने लगे। वह बेसब्री से पृष्ठ लगी और फिर गौर से कुछ पढ़ने लगी पर यह क्या उसके चेहरे पर घबराहट के भाव बढ़ते ही जा रहे थे। उसने अचानक से अखबार को बंद करके मेज पर पटका और टीवी ऑन कर लिया। रिमोट से न्यूज चैनल सैट कर के वह सोफे पर पसर गयी। शहर में जहरखुरानों का गिरोह सक्रिय होने की खबर चल रही थी। कैसे कुछ दिनों से कई बच्चे इस गिरोह ने अपहृत कर लिये थे। कई बुजुर्गों को भी निशाना बनाया गया था। कुछ पीड़ित जो समय रहते अपनों के पास पहुँच गये या जो भाग्य से बच गये, उनका इंटरव्यू चैनल पर बार-बार प्रसारित किया जा रहा था। एक पीड़ित बुजुर्ग बता रहीं थी," अरे भगवान कैसा जमाना आ गया है। तिलक लगाये बाबा जी थे वे तो। बोले थे बेटा लो मैय्या का प्रसाद खाओ, तुम्हारे सब दुःख दूर हो जायेंगे। बेटा रिक्शा लेने गया था मैंने प्रसाद माथे से लगा थोड़ा सा मुँह पर रखा भर था पर जब होश आया तो यहाँ अस्पताल  में आँख खुली। "बेटा बता रहा था,"जब मैं रिक्शा लेकर लौटा तो माँ  पेड़ के सहारे बेसुध पड़ी थी। पैसों का पर्स गायब था। नाक, कान, गले और हाथ के जेवर गायब थे पर माँ मिल गयी यही बहुत है वरना हमारे पड़ोसी का तो नौ साल का बेटा नहीं मिल रहा जो उसी रास्ते से गुजरता था। उस महिला का रो रो कर बुरा हाल था जिसका बेटा अपहृत हुआ था। राधा की बेचैनी बढ़ती जा रही थी टीवी देखकर तो उसका मन और भी भारी हो गया था, आँसू आँखों के कोने पर छलकने को तैयार बैठे थे|राधा ने नजर घड़ी की ओर दौड़ायी तो उसका दिल धक-सा कर गया। इस समय तक तो उसके बच्चे घर आ जाते थे। पता नहीं कैसे कैसे ख्याल उसके दिल में आने लगे। उसने आनन-फानन घर बंद किया, चप्पलें पहनी और बाहर गली का रुख किया ही था कि नन्हें मनु और मीनू की चहकती आवाजें सुनायी दी। जैसे प्राण लौट आयें हो, बदहवास सी राधा ने दोनों बच्चों को गले से लगाकर बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया। बच्चे अवाक् से माँ को निहार रहे थे। कुछ देर बाद बड़ी मीनू बोली,"क्या हुआ माँ?"माँ जैसे होश में आयी और बच्चों को प्यार से देखती हुई बोली,"कहाँ रह गये थे तुम दोनों आज? कितनी देर लगा दी। "मनु उछल कर बोला,"माँ,मीनू दीदी गन्दी है। रास्ते में एक बाबाजी मिले थे,वो प्रसाद बाँट रहे थे, पर दीदी ने प्रसाद खाने नहीं दिया। आप ने बताया था न कि प्रसाद को कभी मना नहीं करते फिर भी। है न दीदी गन्दी,आप इनको डाँटना ।हाँ।" राधा ने किंकर्तव्यविमूढ़ होकर मीनू की ओर देखा। अब मीनू की बारी थी," माँ जब हम स्कूल से आ रहे थे तो मनु का जूता खुल गया था और इसने लैस बाँधने की कोशिश की थी जब इससे लैस नहीं बँधी तो मैंने इसकी लैस बाँधी थी तो हम दोनों के हाथ गंदे थे फिर हम जूतों वाले गंदे हाथों से प्रसाद कैसे खाते? इसलिए मैंने बाबा जी से प्रसाद लेकर बैग में रख लिया अब हम हाथ धोकर प्रसाद खा लेंगे मैंने ठीक किया न माँ? "हाँ बेटा बिल्कुल ठीक किया। "राधा इससे अधिक कुछ न कह सकी। उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि उसकी एक सीख ने उसकी दूसरी सीख को निष्प्रभावी कर आज उसके कलेजे के टुकड़ों को सही सलामत उसके सामने ला दिया। अचानक राधा ने मीनू का बैग खोलकर प्रसाद का दोना निकाला और नाली में फैंक दिया। नन्हा मनु चिल्लाया,"अरे माँ आपने भगवान का प्रसाद नाली में फैंक दिया भगवान नाराज होंगे अब" राधा दोनों बच्चों को पहलू मे समेटते हुए बोली,"नहीं होंगे। ये प्रसाद नहीं जहर है।" बच्चे कुछ नहीं समझ पा रहे थे प्रसाद आखिर जहर कैसे हो गया।

-हेमा तिवारी भट्ट
बैंक कालोनी, खुशहालपुर
मुरादाबाद - 244001 (उ.प्र.)
सम्पर्क सूत्र : 9720399413

मंगलवार, 16 अगस्त 2016

हिन्दी दिवस पर किया जाएगा डाॅ० राजीव सक्सेना को सम्मानित 

हिन्दी साहित्य संगम की कार्यकारिणी की बैठक

             दिनाँक  15 अगस्त, 2016 को हिन्दी साहित्य संगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक सनातन धर्म मिलन धर्मशाला, मिलन विहार, मुरादाबाद में आयोजित की गई।

             बैठक में सर्वसम्मति से जितेन्द्र कुमार जौली को संस्था का महासचिव, राजीव 'प्रखर को कार्यकारी महासचिव और आनन्द कुमार गौरव को सदस्य संरक्षक समिति बनाया गया।


              इसके बाद हिन्दी दिवस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई । संस्था के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी ने बताया कि इस बार भी गत वर्षों की भांति हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमे काव्य-गोष्ठी, विचार-गोष्ठी और सम्मान तीनो कार्यक्रम होंगे।

              बैठक में सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया गया कि इस वर्ष हिन्दी दिवस के अवसर पर बाल साहित्य के क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले मुरादाबाद के विख्यात साहित्यकार डाॅ० राजीव सक्सेना जी को सम्मानित किया जाएगा। उन्हे सम्मान स्वरूप मानपत्र, प्रतीक चिन्ह अंग-वस्त्र आदि भेंट किए जाएंगे।

              बैठक की अध्यक्षता श्री रामदत्त द्विवेदी ने की तथा संचालन श्री योगेन्द्र वर्मा व्योम ने किया। बैठक में अम्बरीष गर्ग, जितेन्द्र कुमार जौली, राजीव प्रखर, प्रदीप शर्मा, विकास मुरादाबादी, ओंकार सिंह ओंकार, के.पी. सिंह सरल, राम सिंह निःशंक, यू.पी. सक्सेना अस्त आदि लोग उपस्थित रहे।

स्वतंत्रता दिवस के नाम रही राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की कवि-गोष्ठी 

राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की मासिक कवि-गोष्ठी

             14 अगस्त, 2016 को राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से जम्भेश्वर विश्नोई धर्मशाला लाईनपार मुरादाबाद मे स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके की गयी।



            इस अवसर पर कवियो ने वीर रस से परिपूर्ण गीतों एवं कविताओं से लोगों के हृदय में देशभक्ति के भाव भरे। कार्यक्रम की अध्यक्षता योगेन्द्रपाल सिंह विश्नोई ने की। मुख्य अतिथि रघुराज सिंह निश्चल, विशिष्ट अतिथि श्री के० पी० सिंह सरल  और राजीव सक्सेना रहे। माँ शारदे की वन्दना रामसिंह निःशंक ने प्रस्तुत की तथा संचालन राजीव प्रखर ने किया।

           गोष्ठी मे जितेन्द्र कुमार जौली, योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई, ओमकार सिंह ओंकार, रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ, रामदत्त द्विवेदी, राजीव सक्सेना, के० पी० सिंह सरल, हेमा तिवारी भट्टा, राजीव प्रखर, रघुराज सिंह निश्चल, राम सिंह निःशंक, ऊदल सिंह सहयोगी, आशु मुरादाबादी आदि ने काव्यपाठ किया।

शनिवार, 13 अगस्त 2016

हिन्दी साहित्य संगम की मासिक काव्य गोष्ठी 

हिन्दी साहित्य संगम की मासिक काव्य गोष्ठी 

    दिनाँक  7 अगस्त, 2016 को हिन्दी साहित्य संगम की मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन आकाँक्षा विद्यापीठ इण्टर कालेज, मिलन विहार, मुरादाबाद में किया गया। कार्यक्रम  का शुभारम्भ श्री वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी द्वारा सरस्वती वंदना कर तथा माता सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। 



    कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री ओंकार सिंह 'ओंकार' ने की। मुख्य अतिथि  श्री राकेश चक्र तथा विशिष्ट अतिथि श्री रामसिंह निःशंक रहे।  कार्यक्रम का संचालन राजीव प्रखर ने किया। गोष्ठी में कवियों ने जहां साहित्यिक विषयों पर अपनी रचनाएं पढ़ी समसामयिक विषयों को भी नहीं छोड़ा तथा प्रकृति से सम्बंधित रचनाएं भी पढ़ी। 

     अपनी रचना में जितेन्द्र कुमार जौली ने कहा कि- गौ रक्षक के देखिए , कितने उच्च विचार। जो भी काटे गाय को, तुम उसको दो मार।। अपनी रचना में वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी ने कहा कि- ‘‘खादी-खाकी आज खो रही दुनियां में अपनी पहचान, मानव से दानव होने का करा रही दुनियां को मान’’  डा. राकेश चक्र ने कहा कि- माँ मूरत प्रेम की, शतिल छांव समीर। खुद पीरों को सह गयी, है गंगा का नीर।। राजीव प्रखर ने कहा कि - कान्हा बोले यूं मैया से, क्यूं
कलियुग में जाऊं मैं । जो माखन अब नहीं है असली काहे भोग लगाऊं मैं।। 

   इस मौके पर हिन्दी साहित्य संगम के अध्यक्ष रामदत्त द्विवेदी, राम सिंह नि:शंक, ओंकार सिंह ओंकार, योगेन्द्र वर्मा व्योम, केपी सिंह सरल, पदम सिंह यादव, आशु मुरादाबादी, रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ , हेमा तिवारी भट्टा, योगेन्द्र पाल सिंह, प्रदीप शर्मा आदि कवियों ने आपनी सुन्दर-सुन्दर रचनाएं पढ़ी।

शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

हिन्दी साहित्य संगम की कवि गोष्ठी 

हिन्दी साहित्य संगम की कवि गोष्ठी 

दिनाँक 3 जुलाई, 2016 को हिन्दी साहित्य संगम की ओर से आकाँक्षा विद्यापीठ मिलन विहार, मुरादाबाद में मासिक कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत माँ शारदे के चित्र पर माल्यार्पण तथा के0पी0 सिंह 'सरल' द्वारा सरस्वती वन्दना प्रस्तुत करके की गई। इसके बाद रचनाकारों ने काव्यपाठ द्वारा समाज की समस्याओ पर विचार व्यक्त किये।



                कार्यक्रम मे रामदत्त द्विवेदी, के.पी. सिंह सरल, संजीव आकाँक्षी, जितेन्द्र कुमार जौली,  रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ, अम्बरीष गर्ग, राजीव प्रखर, रामदत्त द्विवेदी आदि ने काव्यपाठ किया। 

               कार्यक्रम की अध्यक्षता रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ ने की। मुख्य अतिथि श्री संजीव आकांक्षी तथा विशिष्ट अतिथि अम्बरीष गर्ग रहे। कार्यक्रम का संचालन राजीव प्रखर ने किया। कार्यक्रम के अन्त में संस्था के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया।


मंगलवार, 9 अगस्त 2016

 गीत-संग्रह 'रिश्ते बने रहें' का किया गया लोकार्पण

गीत-संग्रह 'रिश्ते बने रहें' का किया गया लोकार्पण

साहित्यिक संस्था 'अक्षरा' एवं 'हिन्दी साहित्य संगम' के संयुक्त तत्वावधान में 5 जून 2016 को सुप्रसिद्ध नवगीतकार श्री योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' के समकालीन गीत-संग्रह 'रिश्ते बने रहें' का लोकार्पण-समारोह मुरादाबाद में मिलन विहार दिल्ली रोड स्थित आकांक्षा इण्टर कॉलेज, के सभागार में संपन्न हुआ l इस अवसर पर एक भव्य काव्य-गोष्ठी का भी आयोजन किया गया l



कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ कवि श्री वीरेन्द्र सिंह 'बृजवासी' द्वारा प्रस्तुत  सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध नवगीतकार श्री माहेश्वर तिवारी ने कहा कि "व्योम के नवगीतों की भाषा इतनी सहज, सरल और बोधगम्य है कि पाठक को शब्दकोश तक जाने की ज़रूरत महसूस नहीं होती। निश्चित रूप से संग्रह 'रिश्ते बने रहें' की रचनाएँ आमजन और कविता के बीच के क्षत-विक्षत पुल की मरम्मत कर उसे आवाजाही के लिए सुगम बनायेंगी।"  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार श्री बृजभूषण सिंह गौतम 'अनुराग' ने लोकार्पित कृति 'रिश्ते बने रहें' के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि "संग्रह के नवगीत किसी बौद्धिक प्रचंडता की दादागीरी न होकर कसकती संवेदना के भावनात्मक संवाद हैं जो हृदय से निकलकर हृदय तक जाते हैं। संग्रह के नवगीतों में प्रतीक और बिम्ब बिल्कुल नए और अनछुए हैं।" विशिष्ट अतिथि  डॉ. अजय 'अनुपम' ने कहा कि "गीत-संग्रह 'रिश्ते बने रहें' ऐसे भावप्रवण यथार्थ के संवेदनाजन्य समकालीन गीतों का संकलन है जहाँ कड़वे सच को भी भाषा की मीठी चाशनी में पगाकर प्रस्तुत किया गया है।" विशिष्ट अतिथि श्री ओंकार सिंह 'ओंकार' ने कहा कि "आज के बाजारवाद और तकनीकी रूप से विकसित समय में सबसे अधिक क्षति रिश्तों के धरातल पर ही हुई है, संयुक्त परिवारों की परंपरा कहीं खो गई है और लोग अपनी निजता को प्रमुखता दे रहे हैं। ऐसे विद्रूप समय में कृति 'रिश्ते बने रहें' एक ताज़गी भरी उम्मीद जगाती है।" वरिष्ठ साहित्यकार श्री अशोक विश्नोई, डॉ. कृष्ण कुमार 'नाज़' एवं युवाकवि अंकित गुप्ता 'अंक' ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए l
इस अवसर पर लोकार्पित कृति के रचनाकार योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने काव्यपाठ करते हुए कहा- "चलो करें/कुछ कोशिश ऐसी/रिश्ते बने रहें। रिश्ते जिनसे/सीखी हमने/बोली बचपन की। संबंधों की/परिभाषाएँ/भाषा जीवन की। कुछ भी हो/ ये अपनेपन के/ रस में सने रहें।" तथा एक और नवगीत प्रस्तुत किया- "छोटा बच्चा/पूछ रहा है/कल के बारे में। अन्तर्धान/हुए थाली से/रोटी-दाल सभी। कहीं खो गए हैं/जीवन के/सुर-लय-ताल सभी। लगता ढूंढ रहे/आशाएँ/ज्यों इकतारे में।" कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ कवि श्री विवेक 'निर्मल' ने किया । आभार अभिव्यक्ति हिन्दी साहित्य  संगम संस्था के अध्यक्ष श्री रामदत्त द्विवेदी ने प्रस्तुत की।
 कार्यक्रम में स्थानीय साहित्यकार सर्वश्री डॉ. आर.सी.शुक्ला, मनोज 'मनु', प्रदीप शर्मा, राजीव 'प्रखर', जितेन्द्र कुमार जौली, रामवीर सिंह 'वीर', यशपाल सिंह 'खामोश', विकास मुरादाबादी, राम सिंह 'निशंक', श्रेष्ठ वर्मा, प्रवीन कुमार, परशुराम 'नयाकबीर', योगेन्द्रपाल सिंह विश्नोई, सतीश 'फिगार', ज़िया ज़मीर, रामेश्वर प्रसाद वशिष्ठ, के.पी.सरल, योगेन्द्र रस्तोगी, शबाव मैनाठेरी, शिशुपाल मधुकर आदि उपस्थित रहे।